नालंदा विश्वविद्यालय क्यों बर्बाद कर दिया गया इसके पीछे क्या कारण था लिए जानते हैं इस ब्लॉक के माध्यम से
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नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) को जलाए जाने की घटना भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। इसे नष्ट करने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं, मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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✅ 1. कौन था हमलावर और कब हुआ हमला?
हमलावर: बख्तियार खिलजी (Bakhtiyar Khilji), एक तुर्की सेनापति।
समय: 1193 ईस्वी (12वीं शताब्दी के अंत में)।
वह मोहम्मद गौरी के अधीन काम करता था।
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✅ 2. क्यों जलाया गया नालंदा विश्वविद्यालय?
उस समय बख्तियार खिलजी का उद्देश्य भारत में इस्लामी सत्ता का विस्तार करना और स्थानीय बौद्ध और हिंदू संस्कृति को खत्म करना था।
नालंदा केवल एक विश्वविद्यालय नहीं था, बल्कि ज्ञान का मंदिर माना जाता था। यहाँ बौद्ध, जैन, हिंदू धर्म की शिक्षाएँ, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य का अद्भुत संग्रह था।
खिलजी को यह लगता था कि जब तक इन विद्वानों और ग्रंथों का प्रभाव रहेगा, तब तक उसकी सत्ता को चुनौती मिलेगी।
इसलिए उसने इसे पूरी तरह खत्म करने का आदेश दिया।
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✅ 3. कैसे नष्ट किया गया?
खिलजी ने अपनी सेना के साथ नालंदा पर हमला किया, हजारों भिक्षुओं की हत्या की।
विश्वविद्यालय के विशाल पुस्तकालय (जिसमें लाखों पांडुलिपियाँ थीं) को आग लगा दी गई, जो 3 महीने तक जलता रहा।
इसमें तक्षशिला विश्वविद्यालय के बचे हुए ग्रंथ, वेद, उपनिषद, चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान के अद्भुत ज्ञान शामिल थे।
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✅ 4. इतना बड़ा नुकसान क्यों हुआ?
उस समय भारत में राजनीतिक अस्थिरता थी। मगध क्षेत्र में बौद्ध धर्म प्रचलित था, लेकिन मजबूत सैन्य सुरक्षा नहीं थी।
खिलजी ने अचानक हमला किया और तत्काल रक्षा संभव नहीं हुई।
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✅ 5. परिणाम
भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली को गहरा आघात पहुँचा।
हजारों साल का ज्ञान नष्ट हो गया।
इसके बाद भारत में बौद्ध शिक्षा का पतन हुआ।

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